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Gaganyaan: वायुसेना के 7 पायलटों को ट्रेनिंग के लिए भेजा गया रूस, मानव मिशन के लिए चुने गए 12 लोग

नई दिल्ली: भारतीय वैज्ञानिकों व भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मिशन गगनयान की शुरुआत हो चुकी है. इस परियोजना के लिए 12 लोगों को शॉर्टलिस्ट (चुनाव) किया गया है. इसके अंतर्गत आगे की ट्रेनिंग के लिए भारतीय वायुसेना के सात पायलटों को रूस भेजा गया है. एक इंटरव्यू में वायुसेना अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि बाकि बचे लोगों को रूस तब भेजा जाएगा जब सात पायलट वहां से प्रशिक्षण लेकर वापस लौट आएंगे. अधिकारी ने कहा प्रथम स्तर में मिशन गगनयान के लिए 12 लोगों का चयन किया गया है. यह एक स्क्रीनिंग प्रक्रिया है. इन सभी में से अंत में केवल चार लोगों की ही चुना जाएगा जो बाद में इस परियोजना को अंजाम देंगे.

अधिकारी ने बताया कि गगनयान भारत का मानवयुक्त अंतरिक्ष अभियान है. इसरो का उद्देश्य इसे दिसंबर 2021 तक लॉन्च करना है. इस परियोजना का मकसद अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजना है. बता दें कि अंतरिक्ष यान में ऑक्सीजन की आपूर्ति व आवश्यक सामग्री के लिए एक कैप्सूल जुड़ा होगा. इस मिशन के लिए इसरो और भारतीय वायुसेना साथ मिलकर काम कर रही है. पहले गगनयान यात्रियों के लिए अधिकतम आयु सीमा 30 साल रखी गई थी लेकिन इस आयु वर्ग का कोई भी पायलट शुरुआती परीक्षा पास नहीं कर सके जिसके बाद अधिकतम उम्र 41 साल कर दी गई.

वायुसेना के चिकित्सा सेवा के महानिदेशक एयर मार्शल एमएस बुटोला ने कहा- क्रू मॉड्यूल डिजाइन, लाइफ सपोर्ट सिस्टम, ऑनबोर्ड हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम और फ्लाइट सपोर्ट सिस्टम की एयरो मेडिकल कंसल्टेंसी का काम अभी पूरा किया जाना बाकि है. उन्होंने कहा- दुनिया के कुछ सबसे उन्नत देशों ने मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम का प्रयास किया है और इस बीच आई चुनौतियों के कारण उन्हें इस परियोजना को छोड़ना पड़ा और वे सफल न हो सकें. गौरतलब है कि साल 2018 में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी ने भी गगनयान को लेकर सभा को संबोधित किया था. पीएम में इस योजना को महत्वकांक्षी योजना बताया था और इसकी शुरुआत की घोषणा की गई थी.

वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर.के.एस भदौरिया गुरुवार को इंडियन सोसाइटी फॉर एयरोस्पेस मेडिसिन (ISAM) के 58वें वार्षिक सम्मेलन में शामिल हुए. तीन दिवसीय सम्मेलन में उन्होंने कहा कि स्क्रीनिंग की प्रक्रिया अच्छी तरह से चल रही है और मुझे लगता है कि यह बहुत ही पेशेवर तरीके से किया जा रहा है.

भारतीय वायुसेना की भूमिका के बारे में बात करते हुए वायुसेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के साथ तालमेल के साथ अंतरिक्ष यान के डिजाइन पहलू पर ध्यान दिया जा रहा है. साथ ही लाइफ सपोर्ट सिस्टम, कैप्सूल के डिजाइन पर लगातार काम किया जा रहा है. एयर मार्शल एम एस बुटोला ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि गगनयात्रियों (अंतरिक्ष यात्रियों) को रूस में अंतिम अंतरिक्ष यात्री चयन और प्रशिक्षण से गुजरना है.

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