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अमेरिका ने दिया फिलिस्तीन को एक और झटका, विवादित वेस्ट में यहूदी बस्तियों की वैधता पर लगा दी मोहर

लॉस एंजेल्स। अमेरिका ने इजराइल के प्रति अपनी नीतियों में बड़ा बदलाव किया है। ट्रम्प प्रशासन ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के समय की नीति को पलटते हुए इजराइल के वेस्ट बैंक और पूर्व येरुशलम पर कब्जे को मान्यता दी है। विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने सोमवार को कहा कि वेस्ट में दशकों से इजराइली बस्तियों को अन्तरराष्ट्रीय कानून की दृष्टि से भी असंगत कहना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा है कि इजराइल और फ़िलिस्तीन को चाहिए कि वे इस मसले में खुद परामर्श करे।

उल्लेखनीय है कि 1967 में मध्य पूर्व के युद्ध में इजराइल ने इस वेस्ट बैंक पर अपना अधिकार जमा लिया था और वहां करीब छह लाख यहूदी बस गए थे। इस पर फिलिस्तीन तभी से इन इजराइली बस्तियों के निर्माण पर सवाल उठाता आ रहा है। इन्हें अन्तरराष्ट्रीय कानूनों की दृष्टि से भी अवैध क़रार दिया जाता रहा है। फिलिस्तीन अपने इस क्षेत्र से इजराइली बस्तियों को हटाने की मांग करता रहा है। इसी वेस्ट बैंक में यहूदी घरों के इर्द गिर्द सैकड़ों फिलिस्तीनी परिवार भी है।
इस विवादास्पद क्षेत्र को लेकर संयुक्त  राष्ट्र और इन दोनों देशों इजराइल तथा फिलिस्तीन के बीच तनाव बना हुआ है। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने  इस विवादित मसले में फिलिस्तीन का साथ दिया था। इसी क्षेत्र में ईस्ट यरुशलम भी आता है, जहां इजराइल ने पिछले वर्ष ही तेल अवीव से अपनी राजधानी ईस्ट यरुशलम बनाए जाने की घोषणा की थी। यह वही विवादास्पद क्षेत्र हैं, जहां फिलिस्तीन भी अपनी राजधानी बनाए जाने के लिए उत्सुक था।
पोंपियो ने प्रेस कांफ्रेन्स में कहा  कि दोनों पक्षों के कानूनी पक्ष को सुनने समझने के बाद अमेरिका इस निर्णय पर पहुंचा है कि दशकों से इजराइली नागरिक बस्तियों के निर्माण के पश्चात इन्हें अन्तरराष्ट्रीय कानून की दृष्टि से भी असंगत कहना उचित नहीं होगा। इन बस्तियों के निर्माण के बाद उनकी ओर  से कभी शांति में बाधा नहीं आई।
नेतन्याहू ने कहा- यह ऐतिहासिक गलती में सुधार जैसा 
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रम्प प्रशासन के इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिकी नीति में बदलाव एतिहासिक भूल सुधार है, लेकिन इस मसले में फिलिस्तीन के प्रमुख वार्ताकार साएब एरेकत ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि अमेरिका के इस निर्णय से विश्व शांति और सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने कहा  कि इसे ही अन्तरराष्ट्रीय कानून कहते हैं तो यह जंगली कानून है।

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