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राज्यसभा में उठा असम अवैध प्रवासी और दिल्ली में पार्किंग संकट का मुद्दा

राज्यसभा में शून्य काल के दौरान शुक्रवार को सदस्यों ने असम में अवैध प्रवासियों की हिरासत और वाहन पार्किंग की समस्या को प्रमुखता से उठाया।

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सरकार से हिरासत केंद्रों में कैद अवैध विदेशी लोगों का व्यवस्थित सर्वेक्षण कराने और तीन साल पूरा हो जाने पर उन्हें कानूनी सेवाएं देने का आग्रह किया।
असम के सिलचर में एक हिरासत केंद्र के दौरे के बाद अपने अनुभव को साझा करते हुए वरिष्ठ नेता ने कहा कि केंद्र में 72 विदेशी थे।

रमेश ने कहा, “इन 72 विदेशियों में से सात म्यांमार से, 17 बांग्लादेश से और 48 भारतीय नागरिक होने का दावा करते हैं। जो 48 बंदी भारतीय नागरिक होने का दावा करते हैं, उनमें से कई राज्य सरकार के कर्मचारी हैं।”

कांग्रेस नेता ने राज्यसभा में कहा, “महोदय सभी लोगों व बहुत छोटे बच्चों को इन हिरासत केंद्रों में देखना बेहद खेदजनक है, क्योंकि उनकी कोई गलती नहीं है।”

उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह के लोकसभा में दिए गए बयान के हवाले से कहा कि शाह ने कहा था कि असम में छह हिरासत केंद्र हैं और 988 विदेशियों को इन केंद्रों में हिरासत में रखा गया है।

रमेश ने कहा, “मैं अवैध प्रवासियों के मामले के लिए अपील नहीं कर रहा हूं। मैं उन लोगों के मामले के लिए अपील कर रहा हूं, जो भारतीय नागरिक होने का दावा कर रहे हैं। ऐसा इस तथ्य की वजह से हैं कि उनके पास उचित दस्तावेज नहीं हैं, क्योंकि वे रोजगार की तलाश में एक जगह से दूसरी जगह जाते रहे और जेल में हैं।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि यह एक मानवीय मुद्दा है न कि राजनीतिक। उन्होंने सरकार से इस मुद्दे पर बेहद संवेदनशील तरीके से कार्य करने का आग्रह किया।

भाजपा नेता विजय गोयल ने दिल्ली में पार्किंग के मुद्दे को उठाया। उन्होंने दावा किया कि पार्किंग से जुड़े विवाद के परिणामस्वरूप हर महीने एक व्यक्ति की हत्या हो रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस को पार्किं ग संबंधी विवाद को लेकर प्रति दिन 250 कॉल आते हैं।

उन्होंने दिल्ली में नई पार्किं ग सुविधाओं के निर्माण का सुझाव दिया, क्योंकि आने वाले सालों में यह एक बड़ी समस्या बन सकती है। इसके साथ ही उन्होंने राजधानी में सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में सुधार करने का प्रस्ताव दिया।

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