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एनआरसी का विरोध करने वाले मुख्यमंत्री एनपीआर को भी रोकें: माकपा

नयी दिल्ली। माकपा ने राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) का विरोध करने वाले राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मंगलवार को केन्द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (एनपीआर) को भी उनके राज्यों में लागू करने से रोकने की अपील की है। माकपा पोलित ब्यूरो ने बयान जारी कर कहा कि एनपीआर में लोगों को अपने माता पिता की जन्मतिथि और जन्मस्थान सहित 21 अन्य ऐसी जानकारियां देनी होंगी जो 2010 में की गयी एनपीआर में जुटाये गये आंकड़ों से बिल्कुल भिन्न है, इसलिये पार्टी एनपीआर का विरोध कर रही है।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुयी मंत्रिमंडल की बैठक में एनपीआर कराने के लिये 8500 करोड़ रुपये मंजूर किये गये हैं। पोलित ब्यूरो ने कहा, ‘‘नागरिकता कानून 1955 में संशोधन और दिसंबर 2003 में वाजपेयी सरकार द्वारा इस बावत अधिसूचित नियमों के तहत एनपीआर तैयार किया गया है और इसी के आधार पर एनआरसी बनाया जाना है। इससे स्पष्ट है कि एनपीआर की कवायद एनआरसी की पहली सीढ़ी है।’’ एनआरसी के बारे में सरकार के स्तर पर कोई फैसला अभी नहीं होने के प्रधानमंत्री मोदी के आश्वासन को गलत बताते हुये माकपा ने कहा कि यह बिल्कुल स्पष्ट है कि एनआरसी के लिये एनपीआर बुनियाद बनाने का काम करेगा।

 

पार्टी पेालित ब्यूरो ने कहा कि कम से कम 12 राज्यों के मुख्यमंत्री अपने राज्य में एनआरसी लागू नहीं करेंगे, जबकि केरल और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्रियों ने एनपीआर को भी नहीं करने की घोषणा कर दी है। माकपा ने एनसीआर का विरोध करने वाले मुख्यमंत्रियों से एनपीआर को भी लागू नहीं करने की अपील की है।

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