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फारुख अब्दुल्ला की रिहाई की मांग को लेकर विपक्ष का वॉकआउट

जम्मू कश्मीर से संविधान के अनुच्छेद 370 और 35ए हटाये जाने के छह माह पूरे होने के मौके पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने लोकसभा में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और श्रीनगर के सांसद डॉ. फारुक अब्दुल्ला की रिहाई की मांग को लेकर नारेबाजी और बहिर्गमन किया।

लोकसभा में शून्यकाल के दौरान कांग्रेस के के. सुरेश ने यह मामला उठाते हुए कहा कि जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाये जाने के छह माह बीत चुके हैं। इसी सदन के सदस्य और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. अब्दुल्ला विगत तीन सत्रों से सदन में आने में असमर्थ हैं। उन्हें यहां आकर अपने विचार व्यक्त करने का अवसर दिया जाना चाहिए।

सुरेश अपनी बात पूरी नहीं कर पाये थे कि उनका माइक बंद हो गया। इससे कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस, द्रविड़ मुनेत्र कषगम के सदस्य खड़े हो गये और डॉ. अब्दुल्ला की रिहाई की मांग दोहराने लगे। लेकिन अध्यक्ष ओम बिरला उनकी मांग पर ध्यान दिये बिना अन्य सदस्यों को बोलने का मौका देते रहे। इससे कांग्रेस, द्रमुक, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, नेकां, वामदलों के सदस्य आसन के सम्मुख आकर नारेबाजी करने लगे।

कुछ देर बाद अध्यक्ष ने कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी को बोलने के लिए कहा। इस पर चौधरी ने कहा कि डॉ. अब्दुल्ला सरकार की अवैध हिरासत में हैं। सरकार अपने रुख पर अडिग है। उन्हें तुरंत रिहा किया जाना चाहिए। लेकिन उनका भी माइक बंद हो गया। इससे विपक्षी सदस्यों में नारागी छा गयी। चौधरी ने बहिर्गमन करने का ऐलान किया और इन विपक्षी दलों के सदस्य सदन से वॉकआउट कर गये।

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