Breaking News
Home / top / असहमति को राष्ट्रविरोधी बताना लोकतंत्र के मूल विचार पर चोट: जस्टिस चंद्रचूड़

असहमति को राष्ट्रविरोधी बताना लोकतंत्र के मूल विचार पर चोट: जस्टिस चंद्रचूड़

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने ‘असहमति’ को लोकतंत्र का ‘सेफ्टी वॉल्व’ करार देते हुए कहा कि असहमति को एक सिरे से राष्ट्र-विरोधी और लोकतंत्र-विरोधी बता देना संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण एवं विचार-विमर्श करने वाले लोकतंत्र को बढ़ावा देने के प्रति देश की प्रतिबद्धता के मूल विचार पर चोट करता है।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने एक व्याख्यान देते हुए कहा कि असहमति पर अंकुश लगाने के लिए सरकारी तंत्र का इस्तेमाल डर की भावना पैदा करता है जो कानून के शासन का उल्लंघन है। उन्होंने कहा, ‘असहमति को एक सिरे से राष्ट्र-विरोधी और लोकतंत्र-विरोधी करार देना संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण एवं विचार-विमर्श करने वाले लोकतंत्र को बढ़ावा देने के प्रति देश की प्रतिबद्धता की मूल भावना पर चोट करती है।’

जस्टिस चंद्रचूड़ की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब नागरिकता संशोधन अधिनियम और प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर को लेकर देश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं।

असहमति लोकतंत्र का एक सेफ्टी वॉल्व

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि असहमति का संरक्षण करना यह याद दिलाता है कि लोकतांत्रिक रूप से एक निर्वाचित सरकार हमें विकास एवं सामाजिक समन्वय के लिए एक न्यायोचित उपकरण प्रदान करती है, वे उन मूल्यों एवं पहचानों पर कभी एकाधिकार का दावा नहीं कर सकती जो हमारी बहुलवादी समाज को परिभाषित करती हैं। उन्होंने आगे कहा कि सवाल करने की गुंजाइश को खत्म करना और असहमति को दबाना सभी तरह की प्रगति- राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक- की बुनियाद को नष्ट करता है। इस मायने में असहमति लोकतंत्र का एक ‘सेफ्टी वॉल्व’ है।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने यह भी कहा कि असहमति को खामोश करने और लोगों के मन में भय पैदा होना व्यक्तिगत स्वतंत्रता के हनन और संवैधानिक मूल्य के प्रति प्रतिबद्धता से आगे तक जाता है।

पहले भी की थी इस तरह की टिप्पणी

गौरतलब है कि जस्टिस चंद्रचूड़ उस पीठ का हिस्सा थे, जिसने उत्तर प्रदेश में सीएए के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से क्षतिपूर्ति वसूल करने के जिला प्रशासन द्वारा कथित प्रदर्शनकारियों को भेजी गई नोटिसों पर जनवरी में प्रदेश सरकार से जवाब मांगा था। जस्टिस चंद्रचूड़ ने इस तरह की टिप्पणी पहले भी की थी जब वे साल 2018 में भीमा कोरेगांव मामले में आरोपी सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी से जुड़ा मामला सुन रहे थे। तब तत्कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस धनंजय वाई चंद्रचूड़ की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने कहा था, ‘असहमति लोकतंत्र का सेफ्टी वाल्व है और यदि आप इन सेफ्टी वाल्व की इजाजत नहीं देंगे तो यह फट जायेगा।’

About admin