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सिंधिया समर्थक विधायकों की बैठक के बाद कमलनाथ को लगा ‘शॉक’, इस बात के लगे कयास

भोपाल : मध्य प्रदेश में कांग्रेस के विधायकों की भाजपा द्वारा खरीद-फरोख्त किए जाने के आरोपों के बीच बुधवार सुबह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक तीन मंत्रियों की बैठक ने कयासबाजी को जन्म दे दिया है। वहीं कांग्रेस नेता इसे सामान्य बैठक मान रहे हैं।

राज्य की कमलनाथ सरकार में सिंधिया समर्थक मंत्रियों के तौर पर तुलसीराम सिलावट, प्रद्युम्न सिंह तोमर और गोविंद सिंह राजपूत की गिनती होती है। इन तीनों मंत्रियों की गोविंद राजपूत के आवास पर बुधवार सुबह बैठक हुई। बैठक के बाद मंत्री बाहर निकले, मगर किसी ने भी मीडिया के सवालों के जवाब नहीं दिए।

सिंधिया समर्थक मंत्रियों की बैठक को लेकर सियासी कयासबाजी तेज हो गई है। वहीं राज्य सरकार के मंत्री सज्जन वर्मा का कहना है कि मंत्रियों की मुलाकात को राजनीति से नहीं जोड़ना चाहिए, क्योंकि सभी मंत्री मंगलवार को ग्वालियर में एक शादी समारोह में शामिल होने गए थे और बुधवार सुबह लौटे हैं।

दिग्विजय सिंह ने कहा, सरकार को कोई खतरा नहीं

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह कांग्रेस के कुछ विधायकों के लापता होने के बाद की रणनीति पर मुख्यमंत्री कमलनाथ से चर्चा करेंगे। दिल्ली से भोपाल रवाना होने से पहले दिग्विजय सिंह ने कहा, “चिंता की कोई बात नहीं है क्योंकि सरकार के लिए कोई खतरा नहीं है।”

कांग्रेस के एक अन्य नेता ने हालांकि कहा कि भाजपा मध्य प्रदेश में कर्नाटक जैसा ‘ऑपरेशन कमल’ चला रही है और ‘हमें साथ में रहना होगा।’ कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायकों को 24 से 30 करोड़ रुपये की भारी राशि का प्रस्ताव दे रही है।

मध्य प्रदेश की 228 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के पास 114 सदस्य हैं और बसपा के दो, समाजवादी पार्टी (सपा) के एक तथा चार निर्दलीय विधायकों की मदद से उसने सरकार बनाई। दो विधायकों के निधन के बाद दो सीटें खाली हैं। भाजपा के पास 107 सीटें हैं।

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