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दिल्ली हिंसा पर GIA की रिपोर्ट, ‘अर्बन नक्सल और जिहादी गुटों ने रची साजिश’

नई दिल्ली: उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के मामले में आज (बुधवार) ग्रुप ऑफ इंटेलेक्चुअल एंड एकेडमिशियन (GIA) ने अपनी फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी को सौंप दी. इस रिपोर्ट में बेहद चौंका देने वाले खुलासे हुए हां. रिपोर्ट के मुताबिक, ‘नॉर्थ ईस्ट दिल्ली दंगा एक सुनियोजित षडयंत्र था.लेफ्ट- जेहादी गुट की एक सुनियोजित तथाकथित क्रांति जिसे दूसरे जगहों पर दोहराने की साजिश रची जा रही है. शहरी नक्सल और जिहादी गुट के नेटवर्क ने इस दंगा की योजना रची और उसे अमली जामा पहनाया. पिछले कई वर्षों से मुस्लिम समुदाय में कट्टरता को जिस तरह से बढ़ाया गया वो दंगे की एक वजह रही है.’

नागरिकता कानून के विरोध के नाम पर हुई हिंसा की शुरुआत
रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में नागरिकता कानून के खिलाफ विरोधी प्रदर्शन वाली जगहों से दंगे की शुरूआत हुई . सभी विरोध-प्रदर्शनों की जगहों पर महिलाओं को एक ढ़ाल की तरह इस्तेमाल किया गया. घरना स्थलों पर चल रहे लगातार नारेबाजी की वजह से स्थानीय लोग काफी चिन्तित और भयभीत थे. सड़कों, गलियों और बाजारों के पास आयोजित प्रदर्शनों की वजह हमेशा वहां अफरा-तफरी का माहौल रहा. शाहीन बाग माडेल की वजह से भी एक तनाव जैसा माहौल बनता रहा.

जिहादी भीड़ ने चुन-चुन कर लोगों को निशाना बनाया
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ये विरोध प्रदर्शन हिन्दू विरोधी , भारत-विरोधी, पुलिस-विरोधी और सरकार -विरोधी रहा है. जेहादी भीड़ ने टारगेट हत्याएं , चुन-चुन कर लोगों को लूटना और खास तबके की दुकानों को निशाना बनाया गया. दंगे के लिए हथियारों को पिछले कई दिनों से जमा किया जा रहा था.  इन दंगों के तार विदेशी ताकतों से जुड़ी हुई है. जिस नृशंसता से आईबी आफिसर अंकित शर्मा और नेगी की हत्या की गई उससे यही लगता है कि इन दंगाईयों के तार ISIS जैसे संगठनों से जुड़े हुए हैं.

ज्यादातर दंगाई बाहरी थे
रिपोर्ट के मुताबिक, ‘हिन्दू- मुस्लिम समाज के नेताओं और पुलिस ने मिल-जुल कर इस दंगे को संभाला. महिलाओं को हिंसा की कई वारदातों का सामना करना पड़ा. पीड़ितों में ज्यादा तादाद अनुसूचित और जनजाति के लोगों की है. दंगाईयों की पहचान होना जरूरी है. ज्यादातर दंगाई बाहरी थे. पीड़ितों का कहना है.जेएनयू जैसे विश्वविद्यालयों के छात्रों ने भी बढ़-चढ़ कर इस में हिस्सा लिया और वो लोगों को उकसाते हुए पाए गए. सीएए -विरोधी प्रदर्शन शुरूआत से ही हिंसक रहा . दंगों की शुरुआत से पहले कई थानों में हिंसक प्रदर्शन के मामले दर्ज हुए.’

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