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जम्मू कश्मीर को सरकार ने वेंटिलेटर पर रख कर आपदाग्रस्त बनाया : गुलाम नबी आजाद

नयी दिल्ली। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने सोमवार को केन्द्र की मोदी सरकार पर जम्मू कश्मीर को ‘राजनीतिक क्वारंटाइन (अलग-थलग की)’स्थिति में धकेलने का आरोप लगाते हुये कहा कि समूचे राज्य को अपने ही देश की सरकार ने ‘वेंटिलेटर’ पर रख कर आपदाग्रस्त बना दिया है।

आजाद ने राज्यसभा में जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख के बजट की अनुदान मांगों से संबंधित चार विधेयकों पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि जिस प्रकार पूरी दुनिया कोरोना वायरस के कारण ‘क्वारंटाइन’ में है उसी प्रकार जम्मू कश्मीर पिछले साढ़े सात महीने से ‘राजनीतिक क्वारंटाइन’ में है।

 

उन्होंने कहा कि कोरोना जनित संकट की वजह प्राकृतिक आपदा है, जबकि जम्मू कश्मीर के संकट की वजह अपने ही देश की सरकार है। उन्होंने कहा कि अच्छा होता अगर इन विधेयकों पर जम्मू कश्मीर विधानसभा में चर्चा होती। आजाद ने जम्मू कश्मीर को केन्द्र शासित क्षेत्र घोषित किये जाने के 7.5 महीने के बाद भी हालात सामान्य नहीं होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी भूल का अहसास हो गया है इसलिये जम्मू कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करना ही इस समस्या का एकमात्र उपाय है। उन्होंने सरकार से यह दर्जा बहाल करने और राज्य के लोगों के भूमि एवं नौकरी के विशिष्ट अधिकारों को अविलंब वापस लौटाने की मांग की। आजाद ने दलील दी कि आज जम्मू कश्मीर जिस आपदा में फंसा है उसकी वजह कुदरत का कहर नहीं है, बल्कि जम्मू कश्मीर में अपने ही देश के रखवाले आपदा बन गये।

आजाद ने कहा कि भाजपा ने सिर्फ अपनी विचारधारा के मुताबिक 70 साल पुराने वादे को पूरा करने की जिद के कारण जम्मू कश्मीर के हित को संकट में डालकर अनुच्छेद 370 हटा दिया।चर्चा में हिस्सा लेते हुए मनोनीत सदस्य राकेश सिन्हा ने कहा कि जिस उम्र में बच्चों को कहानी कविताएं पढ़नी चाहिए, हाथों में स्कूल की किताबें लेनी चाहिए, हम राजनीतिक लोगों ने अपने हित साधने के लिये जम्मू कश्मीर में बच्चों के हाथों में पत्थर पकड़ा दिया।उन्होंने कहा, ‘‘जब देश में रोशनी आती है तो पता नहीं क्यों कांग्रेस को अंधेरा लगने लगता है और जब अंधेरा होता है तो कांग्रेस को क्यों रोशनी नजर आने लगती है?’’सिन्हा ने पूर्व की सरकारों के शासन में नयी दिल्ली और जम्मू कश्मीर के बीच एक ‘‘घाटी’’ खड़ी करने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि मोदी सरकार ने इस दूरी को पाटकर ‘‘जीरो माइल’’ कर दिया है। उन्होंने कहा कि अब वहां पंचायतों में सीधा धन पहुंच रहा है, जो पहले चंद परिवारों के हाथ में पहुंचता था।उन्होंने कहा कि जो कोई पूर्व मुख्यमंत्री या मंत्री या अन्य देश की एकता और अखंडता के खिलाफ बात करेगा तो देश की जनता उसे कभी माफ नहीं कर सकती। सिन्हा ने कहा कि जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाये जाने के बाद राज्य में सामाजिक और आर्थिक क्रांति हुयी है। राज्य के पिछड़े, दलित और जनजातीय समुदायों को राजनीतिक, शैक्षणिक एवं नौकरियों में आरक्षण सुनिश्चित किया जाना सामाजिक क्रांति का सूचक है। जबकि सेब उत्पादक किसानों के अलावा मक्का और धान उत्पादक किसानों को उनकी उपज का पहले से कई गुना ज्यादा कीमत मिलना आर्थिक क्रांति का सूचक है। सिन्हा ने कहा कि पिछले आठ महीनों में जम्मू कश्मीर में सुरक्षाकर्मियों पर हमले, पथराव और आतंकवाद की घटनाओं में अत्यधिक कमी आने के कारण राज्य के लोगों में सुरक्षा के लोगों में चिंता खत्म होना भी सकारात्मक संकेत है।

 

चर्चा में हिस्सा लेते हुये टीआरएस के के केशव राव ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाने संबंधी विधेयक का उनके दल ने इस उम्मीद के साथ समर्थन किया था कि राज्य में जल्द हालात सामान्य होंगे। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस दिशा में तत्काल प्रभावी कदम उठाये जायें, जिससे राजनीतिक बंदियों की रिहाई और जम्मू कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल हो सके। चर्चा में माकपा के के के रागेश, राजद के मनोज कुमार झा और आप के सुशील गुप्ता ने भी हिस्सा लेते हुये जम्मू कश्मीर में नागरिक अधिकारों की बहाली सुनिश्चित करने की मांग की।