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अब कंपनियां नहीं कर पाएंगी ग्राहकों के साथ धोखा, सरकार ने बदले नियम

आने वाले समय में उपभोक्ताओं के साथ किसी भी तरह की चालाकी कंपनियों के लिए भारी पड़ने वाली है। कंपनियों के खिलाफ भ्रामक प्रचार, नकली सामान की बिक्री या ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी के खिलाफ कार्रवाई के लिए सरकार को कोई शिकायत मिलने का इंतजार नहीं करना होगा।

सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (सीसीपीए) किसी भी जरिए से मिली जानकारी के आधार पर शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर सकता है। इतना ही नहीं, सीसीपीए को तय वक्त के अंदर यह तय करना होगा कि पहली नजर में यह शिकायत सही है या नहीं है। इसके साथ सीसीपीए को मामले की जांच का भी अधिकार होगा।

उपभोक्ता संरक्षण कानून पारित होने के बाद केंद्रीय उपभोक्ता मंत्रालय ने सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी के लिए नियमों का मसौदा तैयार कर लिया है। इन नियमों के तहत सीसीपीए के पास किसी भी मामले की खुद संज्ञान लेते हुए जांच का अधिकार होगा। इतना ही नहीं, सीसीपीए के पास तलाशी और सामान जब्त करने का भी अधिकार होगा। अभी तक किसी उपभोक्ता फोरम के पास खुद संज्ञान लेते हुए जांच करने का अधिकार नहीं था। नियमों के मसौदे में कहा गया है कि सीसीपीए को शिकायत मिलने के बाद पंद्रह दिन के अंदर अपनी रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। माना जा रहा है कि इस पहल से उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी में कमी आएगी। कंपनियां भी बाजार में सिर्फ अच्छे उत्पाद को ही लेकर आएंगी।

शिकायतों के निपटारे में तेजी आएगी
कोई शिकायत पहली नजर में सही नहीं पाई जाती है, तो सीसीपीए फौरन मामले को बंद करते हुए शिकायत करने की भी जानकारी दी जाएगी। उपभोक्ता मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि शुरुआती जांच से शिकायतों के निपटारे में तेजी आएगी। अभी तक लंबे वक्त तक यह तय नहीं हो पाता कि उपभोक्ता की शिकायत सही है या गलत है।

अभी तक जांच का अधिकार नहीं था
शिकायत सही पाए जाने की स्थिति में सीसीपीए को तीस दिन के अंदर मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट देनी होगी। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी मानते हैं कि ऐसा करने से शिकायतों का तेजी से निपटारा करने में मदद मिलेगी। अभी तक उपभोक्ता फोरम और अदालतों के पास जांच करने का अधिकार नहीं था। सीसीपीए को कंपनियों को तलब करने का भी अधिकार होगा।

सदस्यों की जिम्मेदारियां अब तय की गईं
उपभोक्ता मंत्रालय ने नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन के नियम भी तैयार कर लिए हैं। इन नियमों के तहत कमीशन के सदस्यों को शिकायतों को सुनने का समय और दूसरी जिम्मेदारियां तय की गई हैं। केंद्र में नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन के साथ प्रदेश में कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन और जिला स्तर पर कंज्यूमर फोरम बनाने का भी प्रावधान है।

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