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मध्य प्रदेशः सरकार गिराने-बचाने के संकट के बीच कोरोना से कितनी सुरक्षित है प्रदेश की जनता?

मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार के बहुमत पर सवालों और राजनीतिक घमासान के बीच विधानसभा की कार्यवाही जिस विश्व महामारी कोरोना के नाम पर 26 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी गई उससे निपटने के इंतजाम प्रदेश में दिखाई नहीं दे रहे हैं।

सवा साल स्वास्थ्य मंत्री रहे तुलसीराम सिलावट बेंगलुरु में डेरा डाले 22 बागी विधायकों में शामिल थे, जिनमें से छह के मंत्री पद छीनने के बाद विधायक पद से इस्तीफा मंजूर मंजूर किए जा चुके हैं। मंत्रियों के विभाग अन्य मंत्रियों को दे तो दिए गए हैं, लेकिन कोई मॉनिटरिंग नहीं हो रही है।

मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक सरकार बचाने में दिन-रात लगे हैं। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सार्क देशों के राष्ट्र प्रमुखों से बात कर रहे हैं, राज्यों के मुख्यमंत्रियो से बात कर रहे हैं, भाजपा संसदीय दल की बैठक हो रही है।

दूसरी तरफ कमलनाथ सरकार और कांग्रेस ऐसा कुछ नहीं करती दिख रही। एमपी की करीब साढ़े आठ करोड़ आबादी कोरोना संकट से आशंकित है। मप्र देश के हर राज्य के संपर्क में है। मप्र देश के बीचों-बीच है, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़ से सटा है और केरल, तमिलनाडु से लेकर कश्मीर, बंगाल, बिहार, ओडिशा समेत देश के 90 फीसदी राज्यों को जाने वाली ट्रेनें यहाँ से गुजरती हैं। ट्रक परिवहन भी मप्र से ही गुजरता है। प्रदेश सरकार ने मप्र की सीमा पर कोरोना प्रतिरोध के कोई प्रभावी इंतजामात नहीं किए हैं। केंद्र सरकार को मप्र के हालात को गंभीरता से लेना चाहिए। सरकार गिराने बचाने से ज्यादा जरूरी  लोगों को सुरक्षित रखना है।

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